सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 116, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ें१०५
बड़ी-बड़ी बीमारियाँ
पत्ते दस तोले फूल-कांसी के कटोरे में नीम के सोटे से घोटे, जिस में पैसा गड़ा हो, यहोंतक कि गाढ़ा होजाय । पीछे बेटी की माँ के दूध में चालीस पहर घोटकर आँख में आँजे ।
जाला-भाड़ा नाखून—
१३—अरहर के पत्तों का रस १४ माशा, छानकर नीम के सोटे से, जिसमें पैसा गड़ा हो, दस कागजी नींबुओं के रस में खरल कर, गोलिएँ बनावेँ और आँखों में आँजे ।
१४—नौसादर की कलम से नाखूने को छूने से नाखूना आराम होता है ।
१५—काली घोंतल तोड़कर उसका टुकड़ा फूल की थाली पर नींबू के रस में रगड़ो, भरहम-सा होने पर गोली या वतियाँ बनाकर सुखा लो, दो-तीन बार आँख में लगाने से जाला कट जाता है । दलका—
१६—समुद्रफेल, कल्या सफेद, सुनी फटकरी, बड़ी हरड की बकल, रसौत, अफीम, नीलाथोथा सबको बराबर पानी में घोटकर रगड़ा बनावे, तो कोयों की सुर्खी, दलका और खुजली को बहुत फायदा करे ।
कोए का नासूर—
१७—जो नाक की थोर के कोए में होता है और दवाने से उसमें से राय-खोह निकलता है । दीए की चीकट कपड़े पर लगाकर उसकी बत्ती नासूर में भरे ।