सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 117, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम चिकित्सा
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परवाल—
१८—पहले वालों को उखाड़ लो, फिर नवसादर वकरी के पिन्ने में मिलाकर पतला-पतला लेप करें।
सिर दर्द कई कारणों से होता है। कभी-कभी गर्मी से भी होजाता है और बहुधा कब्ज से होता है। सिर के रोग इसलिए पहले उसके कारणों को दूर करे।
१—नौसादर, हल्दी तथा पान का चूना मिलाकर सूँघने से आधासीसी और दूसरे प्रकार का दर्द आराम होता है।
२—जौ का आटा पानी में घोल सिर पर लेप करने से गर्मी का सिर दर्द आराम होता है।
मिर्गी-पागलपन, हिस्टीरिया
या मिर्गी की बीमारी बच्चों और बड़ों को भी होती है। ऐसे आदमी चलते-चलते गिर जाते हैं। हाथ-पैर फेंकते हैं, मुंह से भाग गिराते हैं और आँखों की पुतली फैल जाती है। दाँती भिंच जाती है। बेसुध होजाते हैं। इस रोग के दौरे कभी-कभी तो कई दिनों में और कभी-कभी दिन में कई बार होते हैं।
१—जब मिरगी के दौरे हों तो सौंठ, मिर्च, पीपल, नौसादर, इन्द्रायन, कलौंजी इनमें जो-जो चीज मिल जाय, बारीक पीसकर नाक में फूँक दो। ठण्डे पानी के छींटे मुंह पर दे।
२—कूठ, सौंठ, कबाब चीनी, देवदारु प्रत्येक दस माशा। काला मोंगरा, काली मिर्च, अकरकरा, गजपीपल और सने के