भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 124

११३

स्त्रियों की बीमारियाँ

२—गर्भ पानी में बैठाना या पिचकारी लगाना भी अच्छा है। अक्सर औरतें इन दिनों गन्दी रहती हैं तथा गन्दे कपड़े का चिथड़ा काम में लाती हैं, यह बहुत बुरी बात है। कपड़ा साफ लिया जाय और बदल भी साफ रखवा जाय तथा ताजा और हल्का भोजन किया जाय।

इस रोग में चिकना, बदबूदार पतला या गाढ़ा लुआव-सा योनि से निकालता रहता है, कमर में दर्द, कभी-कभी भदर हल्का बुखार बना रहता है। यह श्राव कभी-कभी काला-पीला गर्भ फेनीला या लाल रंग का निकलता है।

शुरु-शुरु में इस रोग में हर तीसरे दिन फिनाइल की पिचकारी देना चाहिए। दो सेर गुनगुने पानी में दस बूँद फिनाइल डी काफी है। इसके बाद यह दवा देना चाहिए।

१—आंवला सूला एक पाव लेकर घी में धीमी आंचपर भून लो, बाद में चरावर कच्ची खांड मिला, कूट छानकर शहद में चटनी-सी बनालो। एक-एक तोला सुबह-शाम खाने से बहुत फायदा करता है।

२—मूँगे की भस्म भी बहुत गुणकारी है।

३—सुपारी पाक इस रोग की बढ़िया दवा है।

४—कच्चा पका केला तथा गूलर खाना बहुत गुण करता है। रक्तभदर—जिसे पैर जाना भी कहते हैं। अगर खून बहुत ज्यादा निकलता है, तो रोगी को ठण्डे पानी के टव में बैठाना।

सुगम चिकित्सा · पृष्ठ 124, कुल 222 में से · BharatKosha