सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 125, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंशुभम चिकित्सा
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१—पुराने घड़े का ठीकरा पानी में घिसकर दे ।
२—चूल्हे की लाल मिट्टी चार माशा पानी के साथ फँकी दो ।
३—रसौत, आम की गुठली, जाम की गुठली, छाप के फूल, चौलाई की जड़, मुलहटी, वरावर लेकर, कूट-छान चूर्ण बनाकर छः-छः माशा सुबह-शाम चावल के धोवन के साथ दो ।
४—पुराना रक्त-प्रदर होने पर ये लड्डू बहुत गुण करते हैं ।
खिले हुए चने का बेसन एक पाव, घी ताजा एक पाव धीरे-धीरे आग पर भूने । पीछे ठण्डा करके एक पाव कच्ची खांड और दस तोला सेलखड़ी पीसकर मिला, एक छटांक के लड्डू बनालो । एक लड्डू रोज़ खाना चाहिए । खुराक ताजा और हल्की ।
गर्भावस्था में औरतों को बहुत से रोग होजाते हैं । बुखार,
गर्भिया सूजन, दस्त लगना, उल्टी, सिर घूमना, खून जाना, गर्भ में तकलीफ़ आदि । इनका इलाज
भी खास होता है । नहीं तो गर्भ गिरजाने का खतरा रहता है ।
१—बुखार होने पर लाल चन्दन, खस, मुलहटी, पद्मराख, तेजपात का काढ़ा, शहद और चीनी मिलाकर पिलाना चाहिए । दूध पीने को देना ।
२—दस्त लगने पर आम और जामुन की छाल का काढ़ा, चीनी, शहद मिलाकर पिलाना, धान की खील पानी में भिगोकर खाने को देना ।
३—कब्ज़ होनेपर दो तोला अरण्डी का तेल दूध में मिलाकर देना ।