सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
DevanagariHindipublished222 पृष्ठ
पृष्ठ 128, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 128
११७
स्त्रियों की श्रीमार्गियाँ
२—गर्म पानी से सेक करनी चाहिए ।
कभी-कभी दूध में खराबी हो जाती है, जिसे पीने से बच्चा बीमार हो जाता है । दूध की बूँद काँच की शीशी में पानी भरकर दूध दूषित हो टपकानी चाहिए । दूध घुल जाय तो अच्छा और नीचे बैठ जाय, तार-तार हो जाय तो खराब ।
१—दशमूल, नीम का पत्ता, सतावर, लाल चन्दन का काढ़ा पिलाने से दूध शुद्ध हो जाता है ।
२—दूध सूख जाने पर बन कपास की जड़, और ईख की जड़ें बराबर कांजी में पीसकर आधा तोला खाने को देना ।
३—सुहाग सोंठ, बघा पैदा होने पर खिलााने से जच्चा को बहुत गुण दिखाती है, ताकत देती है, शरीर को ठीक रखती है ।