भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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बच्चों की बीमारियाँ

बच्चों की बीमारी को पहचानने की रीति—बालक रोता हो और उसके मुँह में भाग आवे तो समझ लेना चाहिए कि उसके कपड़ों में जूँ है, जो बच्चों को काटती है। उसे ढूँढ निकाल देना चाहिए।

अगर बालक बार-बार अपने पैरों को पेट की ओर समेटे और पेट को दवाने या छूने न दे, बराबर रोता ही रहे तो जानना चाहिए कि पेट में दर्द है। आग पर गर्म हाथ करके पेट को सुहाता-सुहाता सेके। या रोगान गुल को गर्म करके पेट पर मल दे। बालक सोकर उठे और जीभ निकाले, इधर-उधर सिर हिलावे तो जानना चाहिए कि वह भूखा है; उसे तुरन्त दूध पिला देना चाहिए। एक करबट देर तक सोने से कोई चीज चुभने से या चींटी अथवा मच्छर के काटने से भी बालक रोता है, इसको अच्छी तरह देख-भाल लेना चाहिए। जो बालक ऐं-ऐं किये ही चला जाय, चुप न हो, रोता रहे तो समझना चाहिए कि कहीं न कहीं दर्द है। जहाँ दर्द होगा

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