भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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चोट और अकस्मात्

बहुधा ऐसा होता है, कि सफ़र और जङ्गल में, समय-कुसमय कभी ऊँची जगह से गिर जाने, कुचल जाने आदि से या अन्य किसी अकस्मात् से चोटें लग जाती हैं। प्रायः ऐसे स्थानों में डाक्टर का मिलना संभव नहीं होता। ऐसी दशा में यह उचित है कि प्रत्येक मनुष्य को ऐसे अवसर पर कुछ कर्तव्य का ज्ञान होना चाहिए, जिससे यदि कभी ऐसी दुर्घटना हो जाय तो, जबतक डाक्टर की सहायता न मिले तबतक रोगी की उपयुक्त व्यवस्था होसके। सबसे प्रथम नीचे लिखी बातों पर ध्यान देना चाहिए।

१—घाव से निकलते लोह को सबसे पहले बन्द करो।

२—घाव में किसी तरह की मैल काँटा, शीशे का टुकड़ा आदि न रहने देना चाहिए।

३—घाव में मक्खी आदि न बैठने देना चाहिए।

४—बेहोश घायल के चारों तरफ भीड़ न होने देना चाहिए।

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