भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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सुगम चिकित्सा

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५—जिसकी हड्डी आदि टूट गई हो, उसे आराम से किसी तरह उपयुक्त स्थान पर पहुँचाना ।

घाव के प्रकार—घाव कई प्रकार के होते हैं ।

१—जिनमें से खून निकले ।

२—जिनमें से खून न निकले ।

३—धारवाले औजार; जैसे छुरी, चाकू, आदि के घाव ।

४—कुचले हुए घाव, जैसे गाड़ी आदि के नीचे आ जाने से हो जाते हैं । जिनमें थोड़ा खून निकलता हो ।

५—नील पड़ना—कुचले घाव में से खून न निकलने से नीला हो जाता है । इसमें नीली दर्दनाक सूजन हो जाती है ।

६—नोकदार शस्त्र के घाव; जैसे तीर, सूरई, काँटा आदि के इन घावों का रूप छोटा होता है, पर बहुत गहरे होते हैं । यदि ये घाव नाड़ी या धमनी तक पहुँचते हैं तो मृत्यु कर देते हैं ।

७—वन्दूक की गोली आदि के घाव । इनमें कभी-कभी हड्डी भी टूट जाती है । आज-कल डाक्टर एक यन्त्र की सहायता से गोली निकाल सकते हैं ।

८—जहरी जानवरों के काटने के घाव; जैसे पागल कुत्ते साँप आदि के ।

अधिक चोट लगने से सूजन बड़ी, लाल और पीड़ावाली होती है और चोट के जगह पर चमड़ी के नीचे खून के इकट्ठे होने

कुचलना

से एक नीले रक्त की दर्दनाक सूजन हो जाती है । मौच आजाने से भी यही बात होती है ।