सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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चोट और अकस्मात
१—चोट की जगह को शरीर से ऊँचा करलो; यदि पाँव पर चोट हो तो लेट जाना चाहिए और कुछ देर तक चलना बन्द रखना चाहिए। यदि हाथ में हो तो हाथ को उपचार रूमाल से गले में लटका देना चाहिए। सिर के नीचे तकिया न लगाना चाहिए, बल्कि एक आदमी उसकी टाँगें उठाए रहे। अगर जरूरत हो तो नकली ढङ्ग से साँस चलानी चाहिए। अगर वह पानी पी सके तो पानी पीने को दो। पर बेहोशी की हालत में पानी मुँह में मत डालो। बेहोशी की हालत में पानी फेफड़े में चला जाता है, इससे नुकसान पहुँचने का डर है।
मामूली घाव, जिससे खून निकल रहा हो, दो हालतों में प्राण-नाश करते हैं। या तो उनका खून बन्द न हो या घाव में मैल-मिट्टी या कोई जहरीली चीज़ रह जाय। इसलिए उचित है कि उसी वक्त खून बन्द करने और घाव को होशियारी से धोकर साफ़ करने का बन्दोबस्त करना चाहिए। हाथों को घाव में लगाने से पहले राख, मिट्टी या साबुन से धो लेना चाहिए और घावों के आस-पास से कपड़ों को दूर रखना चाहिए।
सबसे अच्छा तो यह है कि घाव को गर्म किये पानी को ठण्डा करके धोना चाहिए। पर ऐसा न बन पड़े तो साफ़ ठण्डे पानी से ही काम लेना चाहिए। पट्टी लगाने के लिए साफ़ रुई और कपड़ा काम में लाना चाहिए। यह पट्टी और रुई छेड़ घण्टे तक पानी में उबाल लिये जायें।
खून बन्द करने का उपाय—पहले यह देखना चाहिए कि खून