सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 139, कुल 222 में से
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नाड़ी, धमनी या-वारीक नाड़ियों-में से किसमें से निकल रहा है। यदि वारीक नाड़ी में से खून निकलता हो तो घबड़ाने की कोई बात नहीं है, वह खुद ही बन्द हो जायगा।
सूजन के लिए चोट के स्थान पर बरफ रखना या ठण्डे पानी में कपड़ा भिगोकर लपेट देना चाहिए। दर्द ज्यादा हो या चोट पुरानी पड़ गई हो तो गर्म पानी में कपड़ा भिगोकर और तिचोड़-कर उस जगह को सेकना चाहिए। लेकिन चोट अगर जोड़ पर हो तो जरूर डाक्टर को दिखाने की जल्दी करनी चाहिए।
अगर चोट बड़ी हो, जैसे सिर के बल ऊपर से गिर गया हो, जिससे दिमाग में कुछ नुकसान हो गया हो या पैरों के बल गिर गया हो जिससे कमर में धमक लग गई हो। ऐसा रोगी अगर बेहोश हो गया हो, सांस और नाड़ी की गति धीमी हो गई-हो तो उसकी दशा चिन्ता-जनक समझनी चाहिए। खासकर चोट यदि सिर में हो तो मरने का ज्यादा खतरा है। ऐसे आदमी को जल्दी ही पीठ के बल लिटा देना चाहिए और उसके चारों ओर हरगिज भीड़ न होने देना चाहिए। यदि जङ्गल या सफर में ऐसा मौका हो तो जहाँतक बन पड़े बिना हिलाये किसी डाक्टर के पास पहुँचा देना चाहिए। कपड़े ढीले कर देने चाहिए। पानी पास में हो तो उससे मुँह पर छींटे मारना चाहिए।
नाड़ी से जब खून निकलता है तब उसकी धार बड़े जोर से लेकिन रुक-रुक के निकलती है, जैसे पिचकारी का पानी निकलता है। इस खून का रङ्ग विलकुल लाल होता है। यदि धमनी से खून