सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसगम चिकित्सा
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उसे कूट-छान बराबर खांड मिलाकर कच्चे दूध से फँकी लेने से प्रमेह आराम होता है; धातु पुष्ट होती है।
७—एक गोले में बड़ का दूध टुहकर भर लो, फिर छेद बन्द कर दूध में पकालो। जब सबका भावा होजाय चीनी शहद मिलाकर खाओ। धातु पुष्ट होगी।
८—दो तोला बिनीले की मींग गाय के आध सेर दूध में पका कर खाने से धातु पुष्ट होता है।
९—अण्डकोप की सूजन में या नस उतर आने में तमाखू का पत्ता अण्डकोप पर गर्भ करके बाँधो, थोड़ी देर में उल्टी होगी और नस चढ़ जायगी।
१०—बकरी की मँगनी और खुरासानी अजवाइन बराबर पानी में घोटकर गुनगुना लेप करे।
११—साँप की काँचली की धूनी देने से बच्चा तुरन्त होजाता है।
१२—शल, आँवला, लाल चन्दन, चीनी या गोंद, सुहागा, कत्था, बराबर पानी में पीसकर दाद को खूजाकर लगाने से दाद को आराम होगा।
१३—तीन तोला मनसिल पीसकर एक पाव सरसों के तेल में मिलाकर पकावे। जब धुआँ न रहे तो तेल का वर्तन होशियारी से पानी भरी बाल्टी में डाल दो। तेल पानी पर तैर जायगा। उसे निथारकर लगाने से सब प्रकार की खुजली तर-मूली आराम होगी। इसमें जुलाब लेना जरूरी है।