भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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चोट और अकस्मात

१४—बवूल की सूखी पत्तियाँ पीसकर हाथों पर मलने से हाथों में पसीना आना रुकता है।

१५—उंगलियाँ सूज जाय या उनकी घाई सड़ जाय तो मुर्गी का पर जलाकर चुर्को।

१६—औरंगजेबी फोड़ा, जिसमें छेद हो जाते हैं, इस दवा से आराम होगा। बेलगिरी की मींग, कल्या, नीलाथोथा, बराबर लेकर गोली बनावे और घिसकर लगावे।

चोट-मोच—

१७—चोट लगने से जब खून जम जाय तो यह हलुआ बहुत गुण करता है। एक माशाफिटकरी पीसकर चार तोला धी में भूनों, फिर उस धी में आटा भून और चीनी डाल हलुआ बनाकर खिलाओ।

१८—तिल की खल कूटकर गरम जल में घोल ले, फिर कपड़े पर लपेटकर वह कपड़ा मोच पर बाँधने से मोच को फायदा करता है।

१९—बारहसिंचे का सींग पानी में घिसकर पीने से छाती की चोट का दर्द कौरन आराम होता है।

मुहासे-छीप—

२०—जवासा पानी में पकाकर उस पानी से मुँह धोने से मुहासे आराम होते हैं।

२१ हल्दी और काले तिल, मैस के दूध में पीसकर मलने से छीप को फायदा होगा।