भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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सुगम चिकित्सा

१४२

वद्—

२२—पीपल के पत्ते गर्भ करके सीधी थोरो से बाँधो तो वद् को आराम हो ।

२३—गन्दा विरोजा कपड़े पर फैलाकर वद् पर बाँधो और सेक करो ।

२४ बच्चों की पखली चलना —उसारे रेवन दो रस्ती-से चार रस्ती तक दूध या पानी में मिलाकर बच्चे की उम्र के लिहाज से देना । इससे उल्टी-दस्त आकर छाती साफ हो जायगी ।

२५ कमलबाय—विन्दरल के झोंड़े दो तीन घण्टा पानी में भिगोकर मसल-छान कर नाक में टपकाना । पानी निकल कर तवीयत साफ हो जायगी । तीन माशा पान में खाने का चूना एक पकी हुई केलें की फली में रखकर खिलाने से कमलबाय दूर होती है ।

२६ गजापन—आँवला जलाकर, पावभर पोस्त के झोंड़े जला कर, आधपाव मेंहदी, कचैला, प्रत्येक छः-छः तोला, नीलाथोथा, भुना सुहागा, भड़भूजे के छप्पर का धुँआ, भट्टी की राख, प्रत्येक डेढ़-डेढ़ तोला कूट छानकर सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करे ।

२७—गधे की लीद आधी सूखी हो, उसे एक गढ़े में रखकर ऊपर थोड़े कोयले जलाने, उसके ऊपर काँसी की थाली जिसके किनारे उल्टे हों, इस भाँति रखे कि उसके किनारे दो अंगुल प्रथवी से उठे रहें ताकि लीद का धँआ थाली में संग्रह होता रहे । उस धाँगे को गंज पर मले ।