भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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चौठ और अकस्मात

२८ हाथ पावों का फट जाना—मैंहूँदी पानी में पीसकर लगाने से हाथ-पावों का फटना दूर होता है।

२९ छाजन—तौसादूर मीठे तेल में पीसकर मले।

३० मकड़ी मल जाना — अमचूर पानी में घिसकर लगायें।

३१ सुस्ती की दवा—समुद्रसोख, विदारी कन्द, सरफोका की जड़, कलौंजी, रास्ता, रेवतचीनी, माजुफूल, बेल के फूल, नीम के फूल, बराबर सबको ब्राह्मी के अर्क में घोटकर बेर के समान गोली बनाकर सुबह-शाम खाय तो बल पुष्टि करे।

३२ बंशलोचन एक तोला, सालम मिश्री एक तोला, समुद्र सोख बहुत पेशाब आने की दवा पांच तोला, तालमखान पांच तोला, मुसली सफेद दस तोला, बवूल की फली दस तोला, बिनोले की गिरी दस तोला बराबर पीस बराबर खाँड मिला, ६ मासे से एक तोला तक पानी के साथ या जामन के सिके के साथ खाने से पेशाब ज्यादा आना कम होता है।

३३ शीशों की गोली चलाई हुई सोलह मासे, पीपल छोटी सात नग, सीसे के धारीक पत्र आँख के जाले का तथा घुन्ध का अंजन करके कैंची से काट लो फिर दोनों चीजों खरल कर सुर्मा बनाकर रखो। सोने के समय आँखों में आँजो।