सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम भाषाकला
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३४ तृतिया एक माशा, रीठा दो पानी में घोटकर बाजरे के बराबर गोली बनाकर घिस दच्चो की पसली चलने की दवा कर पिलावे। कै दस्त होकर आराम हो जायगा। यह दवा उस बक्त दी जाय जब और दवा से आराम न हो।
३५ सैंधा नमक एक पाव, तीन पव सैजने के अर्क में खरल हाकमे तथा दर्द की दवा कर गोली बना हंडिया रख मुँह बन्द कपरोटी करके फूँक दो। गर्म पानी के साथ छः माशा खाय।
३६ गन्धक का तेजाव एक तोला, शोरा कल्मी चार तोला, तिल्ली और जियर की दवा हीरा कसीस चार माशा, कुनैन चार माशा सतफौलाद विलायती चार माशा
सब को तीन पाव पानी में मिला एक शीशी में रखो, खुराक चार तोला से आठ तोला तक। दर्द फौन आराम होगा। तिह्री सात दिन में अच्छी हो जायगी।
३७ टूटी हड्डी जोड़ने का नुसखा—पक्की हड् महीन पीसकर थोड़े दूध में मिलावे। इसके चावल बनाकर खीर बना, तीन हफ्ते खाय हड्डी जुड़ जाय।