सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 163, कुल 222 में से
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४ घाव का तेल—नीम के पत्तों की टिकिया बनाकर जलाकर तेल छानलो, यह भी जख्म को भरता है तथा कान के दर्द में भी सुफ़ीद है ।
५ सिर में लगाने का तेल—कपूर, बालछड़, नागर मोथा, कंकोल, गुगल, राल जावत्री, लोंग, नख, सबकी डेढ़ तोला लुगदी पीस दस तोला मीठा तेल में पकाओ । एक-पाव बकरी का दूध डाल दो, इसीमें एक-पाव आँवलों का काढ़ा मिलादो, एक पाव आँवला दो सेंर पानी में पकाकर एक पाव पानी रख लेना चाहिए । जब पानी जलकर सिर्फ तेल रह जाय, छानकर काम में लो, बहुत अच्छा तेल है ।
(६ जख्म का मरहम सादा—प्याज, सावन, कत्था प्रत्येक छः-छः तोला, नीम की पत्तियाँ दस माशे, मीठा तेल-साढ़ेछः तोला पहले प्याज की टुकड़ियाँ करके तेल में जलावे, फिर नीम की पत्तियाँ जलाकर कत्था पीसकर डालदे, और थोड़ा-सा बल्ल जलाकर मिला दे । फिर रगड़कर काम में लावे । बहुत उम्दा मरहम है । सब किसम के जख्मों पर फायदा करता है ।
७. बिवाई का मरहम—राल, घी, प्रत्येक एक तोला आठ माशे, मोम ५ माशे । घी गर्म कर मोम मिला दो, फिर राल डालकर पाँव को भलीभाँति धोकर मरहम भर दो । दिन में चार-पाँच बार करो फायदा होगा ।
८. भगंदर का मरहम—कीमुक ( गंधे का हरे रंग का ) चमड़ा जलाया हुआ, पपरिया कत्था, सेलखरी, मोम प्रत्येक एक तोला