भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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परिभाषा सम्बन्धी खास-खास बातें

वैद्यक के ग्रन्थों में कुछ बातें ऐसी लिखी होती हैं जिनमें पारिभाषिक शब्द आते हैं, उनके खास ही अर्थ होते हैं। उनके न जानने से बहुत से लोग शास्त्रीय नुसखे ठीक-ठीक नहीं बना सकते। इसलिए हम इस अध्याय में परिभाषा-सम्बन्धी बातें लिखते हैं।

एक सरसों का एक जौ, एक जौ की एक रत्ती, छः रत्ती का एक आना। ( सुश्रुत के मत से ) चार रत्ती का एक माशा, चार

माशा का एक शाण, दो शाण का एक कोल नाप-तोल ( लगभग एक तोला )। दो कोल का एक कर्प,

दो कर्प की एक शुक्ति, दो शुक्ति का एक पल ( आठ तोला )। दो पल की एक प्रस्तुति, दो प्रस्तुति की एक अँजलि या एक कड़व ( आधा सेर )। दो कड़व का एक शटाप, दो शटाप का एक प्रस्थ, दो प्रस्थ का एक आदक ( आठ सेर )। चार आदक का एक द्रोण ( ३२ सेर )। दो द्रोण का एक कुम्भ ( ६४ सेर )। एक पल का एक तुला ( १२॥ सेर )। २००० पल का एक भार। दो कुम्भ की द्रोणी या गोष्ठी। ( ३ मन ८ सेर ) चार गोष्ठी का एक खाटी, ( १२ मन ३२ सेर )।

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