सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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परिभाषा-सम्बन्धी स्नास-स्नास बातें
सब जगह शास्त्रीय नुसखों में साफ-साफ बातें नहीं लिखी होती। कहीं-कहीं अतुलक बातें होती हैं। जहाँ अतुलक होती हैं;
वहाँ इस प्रकार समझ लेना चाहिए। किसी अतुलक द्रव्य वनस्पति की कौन चीज काम में लेनी चाहिए।
यह अगर साफ-साफ न लिखा हो तो उसकी जड़ लेनी चाहिए। दवा पकाने का वर्तन कैसा हो यह न लिखा हो तो मिट्टी का वर्तन लेना चाहिए।
दवा की जड़ें अगर पतली हों तो सबकी सब लेना, अगर मोटी हो तो जड़ की छाल लेना चाहिए।
द्रव की चीज न लिखी हो तो पानी लेना चाहिए। चन्दन में लाल चन्दन, मूत्र में गो-मूत्र, सरसों में सफेद सरसों, नमक में संधा नमक, दूध-घी में गाय का दूध-घी। तमाम दवाइयाँ नहीं लेनी चाहिए, सिर्फ गुड़, घी, शहद, धनिया, पीपल और हाँग पुरानी लेनी चाहिए।
कहीं-कहीं कुछ दवाइयाँ नहीं मिलती हैं, उनकी जगह दूसरी दवाइयाँ ली जा सकती हैं। किस दवा की जगह कौन दवा ली
जाय, इसका कुछ संकेत यहाँ देते हैं। पुराना गुड़, न मिले तो नया गुड़ चार पहर धूप में रख
कर काम में लेना, सोरठमिट्टी न मिले तो कीचड़ की पपड़ी लेना। तगर की जगह हार सिङ्गार, लोह भस्म की जगह मण्डूर, सफेद सरसों की जगह लाल सरसों, गजपीपल और चाब की जगह पीपलामूल, केसर की जगह हल्दी, मोती की जगह सीप, हीरे