सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 179, कुल 222 में से
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आस में तथा जुकाम में अडुसे का पत्ता, तुलसी का पत्ता, पान, अदरक अडुसे की छाल, मुलहटी, कटेहली कटहल, और कूठ का काढ़ा, वच, तालीसपत्र पीपल, काकड़ा सींगी और वंशलोचन का चूर्ण। वात-आँस में बहेड़े का काढ़ा। खून की डलटी होने पर अडुसे के पत्ते का रस, या बकरी का दूध। घण्टू-कामला आदि में पित्तपापड़ा या गिलोय का रस। दस्त लाने के लिए—निसोत, सनाय का पानी, या कुटकी का काढ़ा। पेशाब साफ़ लाने के लिए—शोरे का पानी या गोखरू का काढ़ा। पेशाब रोकने के लिए—गुलर या जामुन की बीज का चूर्ण। प्रमेह रोग में—कच्छी हल्दी का रस, आँवले का रस, प्रदर में—गिलोय का रस। रजोदर्शन के लिए—दुरदुर के पत्ते का रस, सन्दनिम में अजवाइन, अजमोद और सोंफ़ का पानी या पीपल, पीपला मूल, मिरच, चाय, सोठ और हींग का चूर्ण। कृमि रोग में विडंग का चूर्ण। वमन रोग में बड़ी इलायची का काढ़ा। वायु रोग में त्रिफला का पानी, सताबर का रस, वीर्य वृद्धि के लिए मक्खन-मलाई का अनुपान ठीक होता है।
रोग और रोगी के बलाबल को देखकर उक्त अनुपानों में काढ़ा या भिगोया हुआ पानी एक छटॉक अथवा दवा का रस दो लोला। चूर्ण का अनुपान हो तो शहद के साथ लिया जाय। पर पित्त रोग में शहद न लिया जाय।