सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 190, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ें१२२:
काम के शास्त्रीय नुसखे
काढ़े
१ गुड्ड्यादि काढ़ा—गिलोय, धनिया, नीमकी छाल, पद्मराख, लालचन्दन, इन चीजों के काढ़े को गुड्ड्यादि कहा गया है। इसमें मधु प्रकार के नये ज्वर, नये दाह, वमन, अरुचि दूर होती है। अग्नि चैतन्य होती है।
२ लुद्रादि काढ़ा—कटेहली, चिरायता, कुटकी, साँठ, गिलोय, और थरंड की जड़। इन छः दवाइयों का काढ़ा पीने से मधु प्रकार का ज्वर जिसमें ग्वाँसी, आस तथा कन्ड भी हैं, आराम होता है।
३ लघुलुद्रादि काढ़ा—कटेहली, साँठ, गिलोय, और थरंडी की जड़, इन चार दवाइयों का काढ़ा पीने से प्रचल कफ वायु ग्वाँसी माँस, अरुचि पीठ या छाती का दर्द वाला ज्वर भी आराम होता है।
४ दशमूल काढ़ा—शालपर्णी, पृष्ठिपर्णी, छोटी कटेहरी, बड़ी कटेहरी, गोखरू, बेलगिरी, थरन्जी, स्योनाक, कम्भारी, पाहुल, इन दस चीजों का काढ़ा पीने से वात, कफ का ज्वर, न्युमोनिया, प्रगृति ज्वर, मल्लिपात ज्वर दूर होता है। इस काढ़े में पीपल का चूर्ण डालना चाहिए।