सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 204, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ें१८७
काम के शास्त्रीय नुसखे
इन्द्रायन की जड़, कनेर की जड़, कूट, आक का दूध, गाय के गोबर का रस । सब एक-एक तोला । शुद्ध भीठा तेलिया दो तोला, सरसों का तेल एक सेर, और तेल से दूना गाय का पेशाब, सबको पकावे । जब तेल रह जाय तब छानकर रक्खो । यह कोढ़, खाज, चकत्ता, फोड़ा, दाद, छाजन, सबको आराम करता है ।
४ लाड़ादि तेल—चार सेर लाख को सोलह सेर पानी में पका कर चार सेर बाकी रहने पर उतारकर छान ले । उसमें एकसेर तिल का तेल तथा चार सेर दही का तोड़ डालकर नीचे लिखी दवाइयों की लुगदी करके मिलादो । सोंफ, असगन्ध, हल्दी, देवदारु, कुटकी, रेणुका, मुर्ची, कूट, मुलेहटी, सफेद चन्दन, नागर-मोथा, और रास्ता, ये सब एक-एक तोला । तेल बाकी रहने पर छानकर काम में लो । पुराने बुखार को दूर करता है । तपेदिक, खाँसी, पीनस, आदि को गुणकारी है ।