सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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छोटे बच्चों की परवरिश के सम्बन्ध में
अक्सर सौ में से पचास बच्चे अपनी आयु के पहले ही वर्ष में मर जाते हैं; और इसका कारण यह होता है कि उनकी ठीक-ठीक परवरिश नहीं होने पाती। माताएँ अक्सर बच्चों के पालन-सम्बन्धी नियमों को नहीं जानतीं। सबसे बड़ी गलती उनसे दूध पिलाने के सम्बन्ध में होती है। अक्सर माताएँ बच्चों को चाहे-जब दूध पिलाने लगती हैं। अगर बालक पेट के दर्द या अजीर्ण से रो रहा हो तो भी उसके मुँह में दूधी टूँस देती हैं। इस का यह फल होता है कि अक्सर बालकों को अपच की शिकायत रहा करती है। और वह अन्य सैकड़ों बीमारियों को उत्पन्न कर देती है, जिससे प्रायः बच्चों की जान पर आ बनती है। हमेशा यह खयाल रखना चाहिए कि बच्चा हो या बड़ा उसे बड़ी खुराक फायदा पहुँचावेगी जो भली-भाँति हज़म होगी। खुराक की टूँसा-टूँस करना बच्चे के लिए किसी भी रूप में लाभदायक नहीं है। इसलिए छोटे बच्चों को दूध पिलाने के नियमों की पावनदी बड़ी बारीकी से की जानी चाहिए।