भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 217

सुगम चिकित्सा

२००

ताजा पानी भरकर उसमें डाल दे। और कसकर डाट लगा दे। और लूझ हिलावे; फिर पानी को ठहरने दे। पाँच-छैं घण्टे पीछे उसका पानी निथार कर दूसरी बोटल में डाल दे। यह चूर्णादिक हुआ। यही चूर्णादिक एक तोला, गरम पानी एक तोला, दूध कच्चा आठ तोला मिलाकर थोड़ी चीनी मिलाकर पिलाओ—पाचन होगा।

दूध पिलाने की काँच की दुब्बी आती हैं; पर वे अच्छी तरह साफ नहीं होती—काँचमें बहुत शीघ्र ही कीड़े पड़ जाते हैं। सो उस का प्रयोग हानिकारक है। इससे यदि उसे प्रयोग करना है, तो दिन में दो बार गर्मजल से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसका काम तुतई (टूटीदार छोटी घण्टी) में रबर की चूसनी, जो बाजार में मिलती है, लेकर काम चल सकता है; पर इसे भी धोने में सावधानी रखनी चाहिए; क्योंकि दूध बहुत शीघ्र विगड़ जाता है। परन्तु सबसे अच्छा और सरल उपाय एक यही है कि रुई के फोहे के द्वारा दूध पिलाया जाय।

बाजार में बिलायती दूध भी बना-बनाया (Condensed Milk के नाम से) मिलता है, उसे पिलाना ठीक नहीं; क्योंकि वह बहुत दिनों का रक्खा हुआ विगड़ा हुआ और दूषित होजाता है। अधिकोश में मेढी और गद्दी का दूध होता है।

ऐसा न करके यदि केवल पानी मिलाकर ही दूध पिलाया जायगा इससे भी उसके पेट में दर्द रहेगा। और बालक रोएगा। बहुधा बालक दूध पीते-पीते स्तनमें सिर मार देते हैं जिससे नाड़ी का मुख बन्द होकर स्तन सूज जाता है और बालक की माता को ज्वर