सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें: ४ :
ऋतु-चर्या
हिन्दुस्तान में ६ ऋतुयें होती हैं। चैत-वैसाख वसन्त। जेठ-अमाह गर्मी। सावन-भादों वरसान। कार-कातिक शरद। अगहन-पूस हेमन्त। माह-फागुन शिशिर।
गंगा के दक्षिणी किनारों के देशों में ४ महीने वर्षा होती है। एक वर्ष में दो अयन होते हैं। १-उत्तरायण २-दक्षिणायण। मकर की संक्रान्ति से कर्क की संक्रान्ति तक ६ महीने उत्तरायण और कर्क की संक्रान्ति से मकर की संक्रान्ति तक ६ महीने दक्षिणायन होता है। शिशिर, वसन्त और ग्रीष्म उत्तरायण में और वर्षा, शरद हेमन्त दक्षिणायन में गिने जाते हैं। उत्तरायण में सूर्य बलवान होते हैं इससे धरती का रस सोखने से सब वनस्पति और प्राणि कमजोर हो जाते हैं। दक्षिणायण में चन्द्रमा बलवान होने से अमृत वर्षा करते हैं। इससे धरती के प्राणियों और वनस्पतियों को नया बल मिलता है।