सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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वसन्त ऋतु में आस्मान साफ रहता है। ढाक, कमल, मौलसिरी और आम फूलते हैं। बन-जङ्गल की शोभा बढ़ती है, ठण्डी-मन्द हवा चलती है वृक्षों में नये पत्ते और कोपल फूलते हैं।
वसन्त
वसन्त-ऋतु में सर्दी का इकट्ठा हुआ कफ पाचन-शक्ति को मन्द करता है इससे इस मौसम में कफकारी चीज नहीं खानी चाहिए। हल्का-रूखा, कडुची, कसैली और नमकीन चीज खानी चाहिए। पोशाक और बिछोना हल्का होना चाहिए। दिन में नहीं सोना चाहिए। सूख कसरत करना, धूम्रना, तैरना, गेहूँ, चावल, मूँग, जो, चना ज्यादा खाना चाहिए।
ग्रीष्म में सूरज की किरणें तेज होती हैं। धूप तेज पड़ती है। नैऋत्य कोण की भूलसाने वाली हवा चलती है। पानी सूख जाता है। वनस्पति मुर्छा जाती है। इस ऋतु में मीठी,
ग्रीष्म
चिकनी, ठण्डी चीजें—शर्बत, छाछ, दूध-लस्सी, दाल-भात, तरकारी खाना, छत पर सोना, दोनों समय स्नान करके सक्रेद कपड़े पहनना और धूप से बचना चाहिए।
वर्षा में बारिश होती है। नदियाँ जल से भर जाती हैं। धरती हरी-भरी हो जाती है। पुरवा हवा चलती है। इस ऋतु में हाजमा कम होजाता है। हल्की और जल्दी हजम होने
वर्षा
वाली चीजें सेवन करना चाहिए। थोड़ा सिरके का सेवन अच्छा है। नींबू चूसना भी फायदेमन्द है। इस मौसम में सब मौसम आ जाती हैं। कभी गर्मी, कभी सर्दी, कभी वर्षा। इसलिए पहचियात रखनी चाहिए। पानी छानकर पीना, बदन को