भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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तत्व की यातें

सूँह और गले में दो नालियाँ हैं। एक आगे एक पीछे। आगे साँस-नाली और पीछे आहार-नाली है। साँस-नाली का मुँह पर एक ढकना है, नाक का छेद भी यहाँ तक है। खाने-पीने की जरा-सी चीज भी इसमें जाने से फन्दा लग जाता है। साँस-नाली ४-५॥ इक्ष लम्बी नर्म हड्डियों के छल्ले से बनी है। नीचे जाकर इसकी शाखायें सारे फेफड़े में फैल गई हैं। यह एक इक्ष मोटी है।

आँत दो प्रकार की हैं; एक छोटी दूसरी बड़ी। छोटी आँत का सूँह मंदे से मिला है। यह कोई २० फीट लम्बी है, इसका दूसरा सिरा बड़ी आँत से मिला है। बड़ी आँत ४ से ६ फीट लम्बी है। इसका दूसरा सिरा गुदा तक जाता है। इसीमें होकर मल निकलता है।

पेट में दाहिनी ओर ज़िगर है। इसके दो हिस्से हैं और १०-१२. इक्ष चौड़ा है। वजन ११-२ सेर होता है। इसके नीचे पित्तकोष है जो अमरूद के फल के समान है।

पेट में चाँई और पसलियों के नीचे तिल्ली है। यह ५ इक्ष लम्बी २ इक्ष चौड़ी और ११ इक्ष मोटी होती है। इसका वजन १५ से २१ तोला तक है। इसका काम खून को रंगना है।

गुदे पीठ के वांस के दोनों ओर हैं। बड़े सेम के बीज के आकार के हैं। लम्बाई ४ इक्ष, चौड़ाई २॥ इक्ष, मोटाई १। इक्ष