भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 38

:६:

रोगी-परीक्षा

रोगी और रोग की परीक्षा करके तब इलाज करना चाहिए। ठीक-ठीक रोग की परीक्षा न होगी तो उसका इलाज भी न हो सकेगा। रोग की परीक्षा के तीन तरीके हैं। कुछ बातें वैद्यक विधि से जानी जाती हैं, कुछ अपने तजुर्वे से और कुछ रोगी को देखने से। बीमार की सूत्र और बातचीत से बहुत-सी बातों का अन्दाजा लगाया जा सकता है। उसे देखकर उसकी ताकत, उम्र और कितना पुराना बीमार है तथा कैसी तबीयत का और कैसी हैसियत का है, ये सब बातें जानी जा सकती हैं। नब्ज देखने और खून, पेशाब, जीभ, दस्त आदि के देखने से बहुत-सी बातें मालूम होजाती हैं।

हाथ के पहुँचे और अंगूठे की जड़ में एक गाँठ है, उसे दवाने से नब्ज देखी जाती है। नब्ज देखने में पुरुष का दाहिना और स्त्री का बाँया हाथ लेना चाहिए। खास-खास नब्ज देखना सौकों पर दोनों पैर, गले और मूत्रेन्द्रिय की भी नाड़ी देखी जाती है। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब रोगी को चलाचली हो और हाथ की नब्ज का पता न चले। नब्ज देखने की