सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 39, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम चिकित्सा
३२
रीति यह है कि नब्ज पर बहुत हल्के ढक्क से अपने दाहिने हाथ की तीनों वीच की उँगलियाँ बराबर-बराबर धरो और बायें हाथ से बीमार का हाथ कोहनी पर से जरा टेढ़ा कर दो और ध्यान से देखो कि किस उँगली के नीचे नब्ज साफ-साफ मालूम पड़ती है। अगर झँगूठे के पासवाली उँगली के नीचे है तो वायु की, वीच की उँगली के नीचे पित्त की और तीसरी उँगली के नीचे कफ की है। तेल मालिश करने के बाद, सोते हुए रोगी की, या खाना खाने के बाद या भूखे-प्यासे रोगी की नब्ज नहीं देखनी चाहिए। तन्दुरुस्त आदमी की नब्ज केँचुए की तरह धीरे-धीरे एक-सी चाल से चलती है। वायु का जोर होने पर साँप की तरह लहराती हुई, पित्त की नब्ज मेंढक की तरह फुदकती हुई और कफ की नब्ज मोर या कबूतर की तरह रुक-रुककर चलती है। सन्निपात की हालत में गड़बड़ नब्ज चलती है और मृत्यु के समय कुछ देर चलकर फिर रुक जाती है, जिसकी नब्ज इस तरह चलते-चलते वीच में रुक-रुक जाय और कहीं बदन पर सूजन न हो तो समझना कि ८-७ दिन में रोगी मर जायगा। जिसकी नब्ज झँगूठे की जड़ से आध झंगुल खसक जाय, उसकी मौत ३ दिन में होगी। जिसकी नब्ज सिर्फ झँगूठे की पासवाली उँगली के नीचे ही मालूम हो वह ४ दिन जियेगा, जिसका बदन बहुत गर्म और नाड़ी बहुत ठण्डी हो वह ३ दिन जियेगा। जिसकी नब्ज भौरि की तरह चक्कर खाकर गायब हो जाय, वह १ दिन जियेगा। जिसकी नब्ज सिर्फ झँगूठे के पासवाली उँगली के नीचे बिजली के समान भटका देकर गायब हो जाय, वह उसी दिन मरेगा। ऐसे रोगी की