भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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फायदेमन्द इलाज

उसे भीगे अंगोष्ठे में लपेटकर सक करने के काम में ला सकते हों, दाँत का दर्द या कमर का दर्द इससे जल्द शर्म बोलल आराम होता है। वदन में गर्मी बनाए रखने के लिए जांघ में, बगलों में, पैर की पिडलियों और टखनों के नीचे सूखे तौलिये में लपेट कर बोलले रखने से दूर तक वदन में गर्मी आयाम रन्वी जा सकती है।

एक भाक मोटे ग्वहर के टुकड़े को लेकर ठण्डे पानी में भिगोओ। और घिना निचोड़े हवा में फैलाकर २-४ मटके दो और द्विताओ हमसे कपड़ा विलकुल ठण्डा हो जायगा। उसकी ठरही गही गही बनाकर मिर पर रखने से बुखार की गर्मी कम होती है। पेड़ पर रखने से पेशाब उत्तरता है। इसमें मिर पर रखने के लिए थोड़ा सिकी और पेड़ पर रखने के लिए शोरा भी मिलाया जा सकता है।

तीसरा को जब हम नहला नहीं मकने तो स्पंज करके उसके वदन को साफ करना चाहिए। इन काम में दो अंगोष्ठे होने चाहिए। पहले भीगे अंगोष्ठे को निचोड़कर स्पंज, उससे एक-एक थक साफ करता, पीछे सूखे से पोछने जाना चाहिए। बुखार उतारने में भी स्पंज बहुत मदद देता है।

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