सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 57, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ें: ६ :
बुखार और उसका इलाज
बुखार की बीमारी सब जीव जन्तुओं को जन्मते और मरते समय जरूर होती है। सब बीमारियों में बुखार खास है। बुखार कई किसम के होते हैं। यहाँ हम थोड़े में खास-खास बुखारों का वर्णन करेंगे।
सब किसम के बुखारों में शुरू में ये लक्षण होते हैं। मुँह का स्वाद खराब हो जाना, शरीर का भारीपन, खाने-पीने में अरुचि, आँखों में बेचैनी, नींद ज्यादा आना, हाथ-पैरों का दूटना, जम्हाई आना, बदन कोंपना, सर्दी लगना, थकान बढ़ना, रौंगटे खड़े होना, और आलस।
पीछे जब वायु का जोर हुआ तो जम्हाई आती है, पित्त का जोर होने पर अरुचि हो जाती है। सब किसम के बुखारों में चमड़ी खूब गर्म हो जाती है।
थर्मामीटर बुखार देखने की एक काँच की नली होती है। इसमें