सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 63, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम चिकित्सा
५२
मलेरिया, मोतीभूरा, चेचक तथा छूत के बुखारों का वर्णन हमने अन्यत्र किया है।
नीचे बुखार के कुछ आजमूसा नुसखे लिखे जाते हैं। जिनसे सब प्रकार के बुखार आराम होते हैं।
१—नीलोफर ६ माशा, खूबकलों ४। माशा दोनों को ढेढ़ पाव पानी में ओटाओ, आधपाव रहे तो छानकर थोड़ी मिश्री डालकर पियो।
२—सफेद कृष्ण ४ भाग, कपूर १ भाग, पानी में जड़ली बेर के समान गोली बनाकर सेवन करनेसे गर्मी का ज्वर दूर होता है।
३—सफेद कृष्ण १ माशा, संखिया १ रत्ती, पीस मोठ के बराबर गोली बनावे। जाड़ा चढ़ने से पहले १ गोली खाय। जाड़े बुखार की बढ़िया दवा है।
४—हरताल तबक्री, फटकरी प्रत्येक १ तोला २। माशा ग्वार-पाठा के रस में नीम के सोटे से घोंटे जिसमें पैसा जड़ा हो। १६ पहर घोटकर टिकिया बनावे और छाया में सुखाकर मिट्टी के बर्तन में ऊपर नीचे पीपल की राख भरकर कपरोड़ी कर गढ़ा खोद जड़ली उपलों की आँच दे। ठण्डा होने पर निकाले, एक चाबल खुराक है। भोजन दूध चाबल दे। एक दिन में कफ और पित्त के ज्वर को आराम करेगा।
५—हींग और नमक दो माशे सेर भर जल में ओटावे जब ६ माशा रहजाय पीवे, चौथैया जाय।
६—नोसादर ३ रत्ती कालीमिर्च दो नग वारी के दिन कूटकर खाने से वारी रुक जाती है।