भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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कीड़ों की बीमारियाँ

कुछ बीमारियाँ कीड़ों से होती हैं। ये कीड़े बहुत छोटे होते हैं और आँख से नहीं देखे जा सकते। ये बहुत भयानक होते हैं और जो बीमारियाँ इनसे होती हैं वे भी भयानक होती हैं। १०० में ६० माँत इन्हीं बीमारियों से होती हैं जो कीड़ों से पैदा होती हैं। ये कीड़े इतने बड़े हैं कि एक रात-दिन में एक २५ करोड़ होजाते हैं। सील, अन्धेरा, सड़ा-गला, साग-पात और गद्दों का गन्दा पानी इन कीड़ों की जन्मभूमि है। ये हैजा, चेचक, मोतीभरा, लाल बुखार, तपेदिक, डिपथिरिया, ताऊन, गर्मी, मोसमी बुखार, आदि रोगों को पैदा करते हैं। इसीसे ये बीमारियाँ छूत की कहलाती हैं। क्योंकि यह उड़कर दूसरों को लगती हैं। इसलिए सब लोगों को दो बातों में होशियार रहना चाहिए। एक तो यह कि जब ऐसी बीमारियाँ फैली हों तो अपना बचाव करे; दूसरे जब ऐसे बीमार की टहल करनी पड़े तो अपनी दिफाजत रखे। याद रखने की बात है कि यह कीड़े ४ ढंग से शरीर में घुसते हैं। या तो खाने-