सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 73, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम त्रिकिंसा-
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ज़रूरी है कि उवाला हुच्चा पानी काम में लाया जाय। सड़ी तर-कारी जो बाज़ार से मौल ली जाय उसे पकाकर खाया जाय, फलों को खाने से पहले गर्म पानी में थोकर छील लेना चाहिए। बच्चों को मुँह में उँगली नहीं डालने देनी चाहिए; न अष्ट-सष्ट चीज़ों की मुँह में रखने की आदत पड़ने देनी चाहिए। इस किसम के कीड़ों के अण्डे कुत्तों और विल्लियों की आँतों में भी होते हैं, जब वे बालक के हाथों को चाटते हैं तो ये कीड़े उनके हाथ में लग जाते हैं, फिर बालक उँगलियों को मुँह में डालकर या उन्हीं हाथों से खाना खाकर उन कीड़ों को मुँह में डाल लेता है।
दस आदमियों में से चार को कद्दूदाने की बीमारी होती है। जिनके पेट में ये कीड़े होते हैं वे बहुत सुस्त और ठीले-ढाले रहते
कद्दूदाने हैं। कद्दूदाना एक सफेद गोलाकार लम्बा और बारीक कीड़ा है। वह तिहाई इच्छ से आध इच्छ
तक लम्बा और सीने के धागे के जैसा मोटा होता है। अगर सीने के मामूली धागे को आध इच्छ के छोटे-छोटे टुकड़ों में काट डाला जावे तो वे कद्दूदाने के जैसे दीख पड़ेंगे। ये छोटे कीड़े बच्चों और बड़ों दोनों के जिसम में घुस जाते हैं। कभी-कभी वे गिनती में बहुत कम, यानी १०-२० ही होते हैं, पर कभी-कभी उनकी गिनती हजारों तक पहुँच जाती है। वे कीड़े आँत की भीतरी परत में चिपक जाते हैं और खून को चूसने लगते हैं। वे सिर्फ़ खून ही को नहीं चूसते वहाँ घाव भी बना देते हैं जिनसे खून रिस्ता रहता है। इस तरह लगातार खून रिसने रहने से और इस जहर से जो