भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 81

सुगम चिकित्सा

७०

डिग्री तक चढ़ जाता है—बड़ी भारी बेचैनी होजाती है। तमाम बदन में और खासकर पीठ और पेट में बहुत दर्द रहता है। जी मिचलाता है, गला सूज जाता है, और जुकाम की शिकायत होजाती है।

तीसरे या चौथे दिन दाने दीख पड़ते हैं। ये दाने पहले माथे और मुँह पर नजर आते हैं, इसके बाद ही एक-दो दिन में छाती, पेट और बाकी हिस्सों में भी नजर आते हैं। शुरु-शुरु में ये बहुत बारीक और लाल रंग के होते हैं—फिर ये धीरे-धीरे ऊपर को उभरते हैं और बड़े होते जाते हैं। छूने से बहुत सख्त जान पड़ते हैं। दूसरे या तीसरे दिन उनमें पानी भर जाता है। पाँचवें दिन उनके बीच में गढ़ा पड़ जाता है और उसके आस-पास लाल चक्कर-सा मालूम देता है। इसके बाद उनमें मवाद होने लगता है और दाने फफोले की शकल में हो जाते हैं। एक-दो दिन में ये फफोले फूट जाते हैं और खुरएड बँध जाता है—या वे काले पड़ जाते हैं। फिर वे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। दाने के ऊपर का खुरएड ४-५ दिन में उतर पड़ता है और उसकी जगह लाल चट्टा रह जाता है। अगर दाने का असर खाल में तहतक घुस गया हो तो यह दाग हमेशा के लिए रह जाता है।

कभी-कभी आँखों पर जहर चढ़ जाता है और वे सूज जाती हैं और वहाँ भी दाने नजर आते हैं। इसीसे आखीर में आँखों में फूला पड़ जाता है, पुतली बाहर निकल पड़ती है या वे बिल्कुल ही जाती रहती हैं।