सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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चमड़ी की बीमारियाँ
मलेरिया के साधारण लक्षण हैं। जाड़ा चढ़ने से पहले रोगी को मलेरिया के लक्षण कमजोरी-सी मालूम होती है। कभी-कभी जी मिचलाकर उल्टी हो जाती है। ठण्ड लगने के बाद १०३ या १०४ तक बुखार हो जाता है और दो-तीन घण्टे रहकर उतर जाता है। कभी-कभी रोज भी ज्वर चढ़ता है और कभी दूसरे दिन—एक दिन छोड़कर चढ़ता है। कभी हफ्ते या महीने में दो बार चढ़ता है।
इसकी सही दवाई कुनैन है। जब बुखार जूड़ी दूसरे या तीसरे दिन आवे तो कुनैन खिलाने की सबसे अच्छी रीति यह है कि जिस दिन जूड़ी आने को हो उससे पहले शाम को एक खुराक अण्डा का तेल गर्म पानी में दे दिया जाय। अगर दोपहर के पीछे तीन बजे बुखार चढ़ता हो तो ६ बजे सुबह ही १५ ग्रेन कुनैन खालो। और इसी तरह दूसरे समय ज्वर चढ़ने से ६ घण्टे पहले खालो। इसी तरह दो हफ्ते तक खाना चाहिए। अगर जूड़ी चढ़ने का कोई नियत समय न हो तो सुबह का खाना खाकर १० ग्रेन कुनैन लो और शाम का खाना खाने के पीछे १० ग्रेन कुनैन खाओ। इसी तरह दो-तीन हफ्ते कुनैन खाना चाहिए।
बालकों को एक-एक ग्रेन कुनैन एक दिन में पाँच बार दो। तीन वर्ष से अधिक उम्र के बालक को दो-तीन ग्रेन दो। परन्तु कुनैन ज्यादा दिन तक अकारण नहीं लेनी चाहिए।