भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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सुगम चिकित्सा

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मच्छर हमेशा जल में पैदा होते हैं। मादा अपने अण्डे तालाब के पानी में, धान के खेत में, पोखर में, बाल्टी में, खाली टीन के पीपे में, गड़ों में, देती है। ये अण्डे दो-तीन दिन में रँगनेवाले कीड़े बन जाते हैं और दो हफ्तों में ये पूरे मच्छर बन जाते हैं। याद रखना चाहिए कि बहते हुए पानी में मच्छर नहीं होते हैं। इसलिए उचित है कि घर के आस-पास गढ़े मत रहने दो—तालाब या पोखर हो तो उनमें नालियाँ खोद दो जिसमें पानी बहता रहे या उनमें मछलियाँ पाल लो, और बत्तखें छोड़ दो। ये सब छोटे-छोटे कीड़ों को खा जाती है। घर के आस-पास कहीं गढ़ा हो और उसमें पानी जमा हो तो उसपर थोड़ा मिट्टी का तेल डाल दो जिससे मच्छर मर जावेंगे। यह तेल पानी पर फैलकर एक सतह बनाता है, जिससे कीड़ों को पानी के ऊपर तैरने की गुंजाइश नहीं रहती। २० फिट लम्बे और इतने ही चौड़े तालाब के लिए एक बोतल तेल काफी है। अगर रोज पानी बरसे तो तालाब में हफ्ते में एक बार तेल छिड़कना चाहिए। यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि ये मच्छर अपनी जगह से ज्यादा दूर नहीं उड़ सकते। मकान से २०० फिट के अन्दर-अन्दर गढ़ा, कूड़ा, कर्कट नहीं रहना चाहिए। मच्छर अक्सर रात को काटते हैं अतः यह सर्वोत्तम बात है कि रात को मच्छरदानी काम में लाई जाय। यह महीन जाली की होनी चाहिए और इस तरह लपेटना चाहिए कि उसमें मच्छर न घुसने पावे।

जाड़ा लगना, ज्वर चढ़ना, पसीना आना, और सिर दर्द ये