भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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६४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ धार वह्यो खग धार हणौ, जल धार सह्यौ गिरिधार गिर्यौ है । भार सच्यौ धन भारथ हू करि, भार लयौ सिर भार पर्यौ है ॥ मार तप्यौ वहि मार गयौ, जम मार दई मन् तौ न मर्यौ है । सार तज्यौ खुट सार पढ्यौ, कहि सुन्दर कारिज कौन सर्यौ है ॥१२॥ कोउ भया पय पान करै नित, कोउक खात हैं अन्न अलौनां । कोउक कष्ट करै निशवासगं, कोउक बैठि कै साधत पौना ॥ कोऊक बाद बिवाद करै अति, कोउक धारि रहै मुख मौना । सुन्दर एक अज्ञान गये बिनु, सिद्ध भयौ नहिं दीसत कौना ॥१३॥ (१२) खग-खड्ग, तलवार । भारथ हूकार-बैल की तरह पचरकर। खुट-खोटा ।