सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ शब्द सार को अंग ॥ [ १२१ भौन उहै भय नाहि न जा महिं, गौन उहै फिर होइ न गौंना । वौन उहै बमिये विषया रस, रौन उहै प्रभु सौं नित रौना ॥ मौन उहै जु लिये हरि बोलत, लोन उहै सब और अलौन। सौंन उहै गुरु सत मिलै जब, सुन्दर शक रहै नहिं कौना ॥५॥ कार उहै अविकार रहै नित, सार उहै जु असार हि नाखै । प्रीति उहै जु प्रतीति धरै उरि, नीति उहै जु अनीति न भाखै ॥ तत उहै लगि श्रत न टूटत, संत उहै अपनौ सत राखै । नाद उहै सुनि बाद तजैं सब, स्वाद उहै रस सुन्दर चाखै ॥६॥ (६) भौन-भवन, मकान । गौन-गमन । वौन-वमन, उल्टी । रौन-रोना । लोन-लवण, नमक । सौन-शकुन, सुगन ।