सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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१२२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ श्वास उहै जु उशास न छाडत, नाश उहै फिरि होइ न नाशा । पास उहै सत पास लगै जम, पास कटै, प्रभु कै नित पासा । बास उहै गृह बास तजै, बनबास नही तिहि ठाहर बासा । दास उहै जु उदास रहै, हरिदास सदा कहि सुन्दरदासा ॥७॥ श्रोत्र उहै श्रुति सार सुनै नित, नैन उहैं निज रूप निहारै । नाक उहै हरि नाक हि राखत, जीभ उहै जगदीश उचारै ॥ हाथ उहै करिये हरि कौ कृत, पाव उहै प्रभु कै पथ धारै । शीस उहै करि श्याम समर्पण, सुन्दर यौ सब कारिज सारै ॥८॥ सोवत सोवत सोइ गयौ शठ, रोवत रोवत कै बर रोयौ । गोवत गोवत गोइ धर्यौ धन, खोवत खोवत ते सब खोयौ ॥ जीवत जोवत बीति गये दिन, बोवत बोवत लै बिख बोयौ ।