सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ शब्द सार को अंग ॥ [ १२३ सुन्दर सुन्दर राम भज्यौ नहिं, ढोवत ढोवत बोझ हि ढोयौ ॥६॥ देखत देखत देखत मारग, बूझत बूझत बूझत आयौ । सूझत सूझत सूझ परी सर्व, गावत गावत गोविंद गायौ ॥ सोधत सोधत शुद्ध भयौ पुनि, तावत तावत कंचन तायौ । जागत जागत जागि पर्यौ जब, सुन्दर सुन्दर सुन्दर पायौ ॥१०॥ ॥ इति शब्द सार को अंग सम्पूर्ण ॥