सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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१४४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ और देवी देव हू उपासना अनेक भांति, शक सब दूरि करि तिनतै न डरि हैं ॥ सब ही के सीस पर पाव दे मुकति होइ, सुन्दर कहत सो तौ जनमै न मरि हैं । मन बच काय करि अंतरि न राखै कछु, सतनि की सेवा करै सोई निसतरि है ॥३०॥ ॥ इति साधु को अंग सम्पूर्ण ॥ (३०) मुकति-मुक्त । अन्तर-भेद, फर्क ।