सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
पृष्ठ 154, कुल 284 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 154
॥ भक्ति ज्ञान मिश्रित को अंग ॥ [ १४५ अथ भक्ति ज्ञान मिश्रित को अंग ॥२१॥ बैठत राम हि ऊठत राम हि, बोलत राम हि राम कह्यौ है । जीमत राम हि पीवत राम हि, घीमत राम हि राम गह्यौ है ॥ जागत राम हि सोवत राम हि, जोवत राम हि राम लह्यौ है । देतहु राम हि लेतहु राम हि, सुन्दर राम हि राम कह्यो है ॥१॥ श्रोत्रहु राम हि नेत्रहु राम हि, वक्त्र हु राम हि राम हि गाजै । शीशहु राम हि हाथहु राम हि, पांव हु राम हि राम हि साजै ॥ पेटं हु राम हि पीठ हु राम हि, रोम हु राम हि राम हि वाजै । अन्तरि राम निरतर राम हि, सुन्दर राम हि राम विराजै ॥२॥ (१-२) घीमत-ध्यान करते हुए । वक्त्र-मुख ।