भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

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१४६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ भूमिहु राम ही आपहु रामै हि, तेज हु राम हि वायु हु रामै । व्योमहु राम हि चदहु राम हि, सूरहु राम हि शीत न घामै ॥ आदिहु रामहि अतहु राम हि, मध्य हु राम हि पु स न बामै ॥ आजहु रामहि कालहु राम हि, सुन्दर रामहि म्हा महि थामै ॥३॥ देख हु राम अदेख हु राम हि, लेख हु राम अलेख हु रामै । एक हु राम अनेक हु राम हि, शेषहु राम अशेष हु तामै ॥ मौन हू राम अमौनहु राम हि, गौनहु राम हि भौनहु ठामै । बाहिर राम हि भीतर राम हि, सुन्दर रामहि है जग जामै ॥४॥ (३) पुस-पुरुष। वामै-स्त्री। म्हामहि-हम सब मे। थामैं-तुम सब मे।