सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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१५६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ नाइकनी पुनि हरषत डोलै, मोहि मिल्यौ नीकौ भरतार । पूंजी जाइ साह कौं सौपो, सुन्दर सिरतै उत्र्या भार ॥२२॥ बनिक एक बनजी कौं आयौ, परै तावरा भारी भैंठि । भली बस्तु कछु लीनी दीनी, खैचि गठरिया बांधी ऐठि ॥ सौदा कियौ चल्यौ पुनि घर कौ, लेखा कियौ बरीतर बैठि । सुन्दर साह खुसी अति हूवा, बैल गया पूंजी मैं पैठि ॥२३॥ पहरायत घर मुस्यौ शाह कौ, रक्षा करनै लाग्यौ चोर । कोतवाल काठौ करि बाध्यौ, छूटै नही साझ अरु भोर ॥ राजा गाव छोडि करि भागौ, हूवो सकल जगत मैं शोर । परजा सुखी भई नगरी मैं, सुन्दर कोई जुलम न जोर ॥२४॥