भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

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पृष्ठ 214

॥ विचार को अंग ॥ [ २०५ देह ओर देखिये तौ देह पच भूतन कौ, ब्रह्मा अरु कीट लग देह ही प्रधान है। प्रान ओर देखिये तौ प्रान सबही कौ एक, क्षुधा पुनि तृषा दोऊ व्यापत समाँन है॥ मन ओर देखिये तौ मन कौ स्वभाव एक, सकल्प विकल्प करि सदा ई अज्ञान है। आतमा बिचार किये आतमा ई दीसै एक, सुन्दर कहत कोऊ दूसरौ न आन है ॥२८॥ ॥ इति बिचार को अंग सम्पूर्ण ॥