सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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२४० ] ॥ सुन्दर विलास ॥ ज्ञानी कर्म करै नाना विधि, अहंकार या तन कौ खोवै । कर्मन कौ फल कछू न वंछै, अंतहकरन वासना धोवै ॥ ज्यौं कोऊ खेतनि कौं जोतत, लै करि वीज भू नि करि वोवै । सुन्दर कहै सुनौ दृष्टान्त हि, नागौ न्हाइ सु कहा निचोवै ॥३२॥ ॥ इति ज्ञानी को अंग सम्पूर्ण ॥