भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 262

॥ अद्वैत ज्ञान को अग ॥ [२५३] जैसे एक मैन के सवारे नर हाथी हय, आदि अन्ति मधि एक मैन ई बखानिये । तैसे ही सुन्दर यह जगत सु ब्रह्ममय, ब्रह्म सु जगत मय निश्चै करि मानिये ॥१७॥ ब्रह्म मैं जगत यह ऐसी विधि देखियत, जैसी विधि देखियत फूलरो महीर मैं । जैसी विधि गिलम दूलीचे मैं अनेक भाति, जैसी विधि देखियत चूनरी ऊ चोर मैं ॥ जसी विधि कागरे ऊ कोट परि देखियत, जैसी विधि देखियत वुदबुदा नीर मैं । सुन्दर कहत लीक हाथ पर देखियत, जैसी विधि देखियत शीतलता शरीर मैं ॥१८॥ ब्रह्म अरु माया जैसे शिव अरु शक्ति पुनि, पुरुष प्रकृति दोऊ कहिकै सुनाये है । पति अरु पतनी ईश्वर अरु ईश्वरी ऊ, नारायन लक्षमी द्वै बचन कहाये हैं । जैसे कोऊ अर्धनारी नाटेश्वर रूप धरै, एक बीज ही तै दोइ दाल नाम पाये हैं । तैसे ही सुन्दर बस्तु ज्यो है त्यौ ही एक रस, उभय प्रकार होई आपु ही दिखाये हैं ॥१६॥ (१७) मैन-मोम । ब्रह्ममय-ब्रह्मस्वरूप ।