सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ आश्चर्य को अग ॥ [ २६३ खोजत खोजत खोजि रहे अरु, खोजत हैं पुनि खोजि हैं आने । गावत गावत गाइ गये बहु, गावत हैं अरु गाइ हैं गाने ॥ देखत देखत देखि थके सब, दीसै नही कहुं ठौर ठिकाने । बूझत बूझत बूझि कै सुंदर, हेरत हेरत हेरि हिराने ॥८॥ पिंड मैं है परि पिंड लिपै नहिं, पिंड परै पुनि त्या हि रहावै । श्रोत्र मैं है परि श्रोत्र सुनै नहिं, दृष्टि मैं है परि दृष्टि न आवै ॥ बुद्धि मैं है परि बुद्धि न जानत, चित्त मैं है परि चित्त न पावै । शब्द मैं है परि शब्द थदयी कहि, शब्द हू सुंदर दूरि बतावै ॥६॥ भूमि हु तैसे हि आपु हु तैसे हि, तेज हु तैसे हि तैसे हि पौना । व्योमहू तैसे हि आहि अखंडित, तैसे हि ब्रह्म रह्यौ भरि भौना ॥ देह सजीग विजोग भयौ जब, आयौ सु कौन गयौ कहि कौना ।