भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

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२६२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ पिंड ही न प्रान नहूँ तौ जान न अजान न तौ, बध निरबान न तौ हरवौ न भारौ है । द्वैत न अद्वैत न तो भीत न अभीत ताते, सुन्दर कह्यौ न जाइ मिल्यौ ही न न्यारौ है ॥५ । इन्दव छन्द पाप न पुंनि न थूल न शुंनि न, वौल न मौन न सोवै न जागै । एक न दोइ पुरुष न जोइ, कहै कहा कोइ न पीछै न आगै ॥ बृद्ध न बाल न कर्म न काल न, ह्रस्व बिशाल न जूझै न भागै । बंध न मोक्ष, अप्रोक्ष न प्रोक्ष, न सुदर है न असुदर लागै ॥६॥ तत्व अतत्व कह्यौ नहिं जात जु, शुंनि अश्रुंनि उरै न परै है । जोति अजोति न जान सकै कोउ, आदि न अति जिवै न मरै है ॥ रूप अरूप कछू नहिं दीसत, भेद अभेद करै न हरै है । शुद्ध अशुद्ध कहै पुनि कौन जु, सुदर बोलै न मौन धरै है ॥७॥ (६) प्रोक्ष-अप्रोक्ष-परोक्ष, अपरोक्ष ।