भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

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पृष्ठ 274

॥ आश्चर्य को अंग ॥ [ २६५ शीत न घाम न ठौर न ठाम न, पुंस न वाम न वाप न मातै ॥ रूप न रेख न मेख अमेख न, श्वेत न पीत न स्याम न तातै । सुंदर माँन गही सिध साधक, कौन कहै उसको मुख वातै ॥१३॥ वेद थके कहि तंत्र थके कहि, ग्रंथ थके निशवासरि गातैं । शेख थके शिव इंद्र थके पुनि, खोजि कियौ बहु भाति विधातै ॥ पीर थके अरु मीर थके पुनि, धीर थके बहु बोल गिरातै । सुंदर मौंन गही सिध साधक, कौन कहै उसकी मुख वातै ॥१४॥ योगि थके कहि जैन थके, रिषि तापस थाकि रहे फल खातै न्यासि थके वनवासि थके जु, उदासि थके बहु फेर फिरातै ॥